सेक्सी लेडी की चुत में मेरा मोटा लंड

यह भाभी हॉट सेक्स कहानी एक सेक्सी लेडी की चूत चुदाई की है जिसके घर मैं बिजली की रिपेयर का काम करने गया था. मैं कैसे उसे चोद पाया? पढ़ कर मजा लें.

दोस्तो, मेरा नाम सुरेश है. मैं गुजरात से अहमदाबाद शहर का रहने वाला हूं. मैं अभी 24 साल का हूं. मेरा लंड सात इंच लंबा है और ढाई इंच मोटा है.

मैं एक बिजली की दुकान में काम करता हूं और एक इलेक्ट्रिशियन हूं.

यह भाभी हॉट सेक्स कहानी कुछ महीने पहले की है.

मैं एक दिन अपनी दुकान में काम कर रहा था.
तभी एक औरत आई. उसको अपने घर पर लाईट का कुछ काम करवाना था.

मेरे सेठ ने उस औरत से उसका पता लिया और कहा कि आदमी आपके घर आ जाएगा.
उसने कहा- जल्दी भेजना, मुझे बड़ी दिक्कत हो रही है.
सेठ ने उसे हां कह कर जाने के लिए कह दिया.

फिर सेठ ने मुझसे उस औरत का पता दिया और कहा कि तुम इस पते पर जाकर उनका काम कर आना.
मुझे समझ आया कि सेठ कह रहा है कि उस औरत का काम उठा आना.

मैं दोपहर को तीन बजे में उस औरत के घर चला गया.

उसके घर के बाहर पहुंच कर मैंने घंटी बजाई और उसके बार आने का इंतजार करने लगा.

एक मिनट बाद उस महिला ने दरवाजा खोला, तो मैं उसको देखते ही रह गया.
अभी मैंने उसे गौर से देखा. उसकी बलखाती सी कमर 34 इंच की थी. चूचे छत्तीस इंच के थे और गांड एकदम उठी हुई अड़तीस इंच की रही होगी. वो बड़ी मस्त माल लग रही थी.

उसने मेरी तरफ देख कर पूछा- हां कहिए?
मैंने उससे कहा कि मैं बिजली का काम करने आया हूं.

तो उसने मुझे अन्दर आने को कहा और बताया कि पूरे घर की लाईट बंद है. पता नहीं क्या हो गया है. जल्दी से ठीक कर दो.

बिजली के मेन बोर्ड के पास जाकर मैंने देखा तो फ्यूज उड़ा हुआ था.
मैंने उसे जोड़ कर ठीक किया और घर की बिजली को चालू करके देखा, तो लाइट आ गई थी.

मैं बाहर वाले कमरे में आया और देखा तो वो वहां नहीं थी.

मैंने आवाज देते हुए कहा- भाभी जी, आपका काम हो गया है.

मेरी आवाज सुनकर भाभी आई और उसने बिजली का पंखा चला कर देखा, तो वो संतुष्ट हो गई.
फिर उसने मुझसे कहा- ठीक है, तुम बैठो. मैं अभी आई.

मैं सोफे पर बैठ गया.

तभी भाभी बाहर आई … उसने मुझे पानी दिया और कहा- तुम मुझे अपना फोन नंबर दे दो … यदि फिर कोई दिक्कत हुई तो मैं तुम्हें फोन कर लूंगी. क्या नाम है तुम्हारा?
मैंने अपना नाम बताते हुए तुरन्त ही अपना फोन नंबर दे दिया.

इसके बाद उस भाभी ने मुझे काम के पैसे दिए और मैं वापस दुकान चला आया.

दो दिन बाद उस भाभी का फोन मेरे फोन पर आया. वो कहने लगी- सुरेश, मेरे घर आ जाओ. मुझे तुमसे कुछ काम है.
मैं दुकान जाने से पहले ही उस भाभी के घर आ गया.

उधर मैंने देखा कि भाभी ने आज लाल रंग की साड़ी पहनी थी. वो इस साड़ी और बिना आस्तीन के गहरे गले वाले ब्लाउज में बड़ी मादक लग रही थी.

उसके उठे हुए चूचे देख कर मुझे उत्तेजना होने लगी.
मैंने उसे इस रूप में देखते ही आज उसको चोदने का सोच लिया.

मैंने उसकी चूचियां निहारते हुए कहा- हां जी क्या काम था?
उसने कहा- मेरे रूम का पंखा बंद पड़ा है. चल कर देख लो.

मैं उसके साथ उसके बेडरूम में गया.
पंखा की ऊंचाई जरा ज्यादा थी तो मैंने भाभी से कोई स्टूल मांगा.

भाभी ने एक स्टूल की तरफ इशारा किया, तो मैं वो स्टूल लेकर उनके बिस्तर पर आ गया.
मैंने भाभी से कहा- आप जरा स्टूल पकड़ लीजिएगा.

भाभी ने स्टूल पकड़ा और मैं ऊपर चढ़ गया. मैंने स्टूल पर चढ़ते हुए उसकी चूचियों को देखा, वो बड़ी ही भरी हुई और एकदम दूधिया रंगत लिए हुए थीं.

मैंने पंखे पर ध्यान लगाया और कुछ ही देर में पंखा ठीक करके नीचे उतर गया.

मैंने पंखा चला कर चैक किया और भाभी से कहा- लो जी भाभी जी, आपकी हवा चालू हो गई.
भाभी मेरे इस डायलाग पर हंस दीं.

उनको हंसता हुआ देख कर मैंने भाभी जी से पूछा- भाईसाब नहीं दिख रहे हैं. क्या आप अकेली रहती हो?
भाभी ने कहा- हां मेरे वो बिजनेस करते हैं, वो बाहर हैं. एक बेटा है वो स्कूल गया है.

आज मेरे पास दुकान में कोई ख़ास काम नहीं था. तो मैं भाभी से बात करने लगा.

भाभी ने कहा- चाय पियोगे सुरेश?
मैंने कहा- हां जी नेकी और पूछ पूछ.

भाभी फिर से हंस दी और किचन में चली गई.

कुछ देर बाद हम दोनों आमने सामने बैठ कर चाय पीने लगे और बात करने लगे.

मैंने भाभी से उनका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम हेमा बताया.

मैंने पूछा- आपके पति शाम को घर आ पाते होंगे.
भाभी ने कहा- अरे मैंने बताया न कि वो शहर से बाहर हैं … वो बाहर रह कर ही बिजनेस करते हैं.

इस बात पर मैं उससे कहने लगा- आप बहुत खूबसूरत हो भाभी जी.

उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी.

मैंने हिम्मत बांधते हुए उससे बात आगे बढ़ाते हुए कहा- आपके पति कितने दिन आपके पास रहते हैं?
उसने उदास होकर कहा- महीने में करीब पांच छह दिन ही इधर रहने के लिए आते हैं.

मैं समझ गया कि भाभी से अपना काम बन सकता है.

उस दिन तो मैं चला गया.
मगर कुछ दिन बाद मैंने उसको एक मैसेज किया- कैसी हो भाभी जी?
भाभी ने लिखा- मैं ठीक हूं. तुम कैसे हो सुरेश.

इस तरह से मेरी उससे बातचीत चलने लगी.
भाभी मुझे चुटकले भेजती थी और मैं भी उसे कुछ न कुछ भेजता रहता था.

एक दिन गलती से मुझसे भाभी के फोन पर एक ब्लू-फिल्म की क्लिप चली गई.
भाभी ने वो क्लिप देखी और ‘मस्त है’ लिख कर वापस मैसेज कर दिया.

मैंने उसकी सहमति सी देखी तो मैंने पूछा- क्या आप मेरी फ्रेंड बनोगी?
उसने मुझे हां कह दिया.

मुझे इससे बड़ी खुशी हुई. अब हमारी बातें चलने लगीं. मैं उसके घर भी जाने लगा था.

फिर एक दिन मैंने उससे बाहर घूमने चलने के लिए कहा, तो वो राजी हो गई.

मैं भाभी को अपनी बाइक पर बिठा कर घुमाने ले गया.

उस दिन मैंने उसको एक सुनसान जगह में किस किया. तो उसने कुछ नहीं बोला.
इससे मैं समझ गया कि उसको भी ये सब पसंद है.

उस दिन उसे अपने बेटे को भी लेने जाना था, तो वो मुझसे स्कूल छोड़ते हुए जाने की बोली.

मैंने उसे उसके बेटे के स्कूल के पास छोड़ा और चला गया.

शाम को उसका मैसेज आया- सुरेश आज रात को तुम मेरे घर आना.
मैं समझ गया कि आज मुझे भाभी चोदने का काम मिल गया है.

अब मैं रात होने का ही इंतजार करने लगा.
देर शाम को 8:30 बजे मैं उसके घर आ पहुंचा.

मैंने देखा कि भाभी ने काले रंग की साड़ी पहनी थी. उसका बेटा भी था.
वो उसको सुलाने के बाद मेरे पास आ गई और मुझे खाना खिलाने लगी.
उसने मुझे अपने हाथ से खाना खिलाया.

मैंने उसके साथ खाना खा लेने के बाद उसे देखा.
उसने कहा- सुरेश आज तुम इधर ही सो जाना.

मैं इस बात से जोश में आ गया.
मैंने उसके तरफ देखा तो वो हंस पड़ी.

मैं लंड सहलाता हुआ एक कमरे में जाकर आराम करने लगा.

वो दूसरे कमरे में जाकर अपने बेटे को सुलाने लगी. थोड़ी देर के बाद उसका बेटा सो गया.

फिर वो मेरे पास आई और मुझसे चिपक कर लिप किस करने लगी.
मैं भी उसको किस करने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी साड़ी ब्लाउज पेटीकोट निकाल दिया. अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई थी.
उसे इस रूप में देख कर मेरा लंड फनफनाने लगा.
मैंने अपने कपड़े भी निकाल दिए.

वो मुझसे बोली- तुम्हारा बदन बड़ा कड़क है.
मैंने कहा- मेरा लंड इससे भी कड़क है भाभी.

लंड की बात सुनकर भाभी मुझे जोर जोर से किस करने लगी.

मैं भी भाभी को किस करने लगा. मैंने उसके रसीले होंठों पर, गाल पर खूब चुम्मे लिए.
फिर मैंने उसकी ब्रा निकाल कर उसके बड़े बड़े मम्मों को दबाने और मसलने लगा.

सच में आज मैं बहुत खुश था. मुझे मक्खन माल चोदने मिला था.

फिर मैंने भाभी को पूरी नंगी किया और उसकी चुत में उंगली करने लगा.

भाभी की मादक कराहें निकलने लगीं- आह उंह … जल्दी से मेरी आग ठंडी कर दो सुरेश मैं बहुत प्यासी हूँ.

भाभी की इन मादक आवाजों से मैंने उसे सीधा लिटा दिया और उसकी चुत में अपना मुँह लगा दिया. अपनी जीभ से भाभी की चुत चोदने लगा.

अपनी चुत चुसवाने में भाभी को बहुत मजा आ रहा था.
वो अपनी गांड उठाते हुए मस्त आवाजें निकालने लगी- आह और अन्दर डालो राजा … और डालो … आह फाड़ दो आज मेरी … फक मी … प्लीज़ अब नहीं रह सकती … जल्दी से लंड अन्दर डाल दो.

फिर मैंने उसके मुँह में मेरा लंड दे दिया.
लंड देखते ही भाभी बोली- बाप रे इतना मोटा लंड … आज तो मैं मर ही जाऊंगी.

वो लंड मुँह में लेने लगी.
लंड चुसाई से पच पच पच की आवाजें आने लगीं.

फिर हम दोनों ने 69 की पोजीशन ले ली. मैं उसकी चुत को मुँह से चोदने लगा वो मेरा लंड चूसने लगी.

थोड़ी देर के बाद भाभी झड़ गई.

अब मेरा लंड उसकी चुत में जाने के लिए एकदम कड़क हो गया था.
मैं भाभी की टांगें फैला कर लंड को उसकी चुत पर रगड़ने लगा.

भाभी- आह अब डाल भी दो राजा … अब नहीं रहा जाता … जल्दी से अन्दर डाल दो.

मैंने उसकी चुत में लंड का सुपारा डाला ही था कि वो चीख पड़ी- उई मम्मी मर गई.
उसकी चुत बहुत टाईट थी. मैं हल्के हल्के लगाते हुए लंड को अन्दर करने लगा.

मेरा लंड अभी आधा ही चुत में गया था कि वो चीखने लगी- आह मर गई … निकालो इसको … आह बहुत दर्द हो रहा है.

पर मैंने भाभी के एक ना सुनी और एक और जोर से धक्का दे मारा.
मेरा पूरा लंड चुत में चला गया था. भाभी को बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था. वो तड़फ रही थी.

मगर मैंने आंखें बंद की और तेज तेज धक्के लगाने लगा.

कुछ पल बाद भाभी भी साथ देने लगी.
वो भी लंड के मजे लेते हुए कामुक आवाजें निकालने लगी- उह आह इस्स … यस … चोदो राजा.
मैं ताबड़तोड़ लंड अन्दर बाहर करने में लगा था.

बीस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला हो गया था तो उसने कहा- अन्दर ही निकाल देना.
मैं भाभी की चुत के अन्दर ही झड़ गया.

उसने थोड़ी देर के बाद फिर से मेरा लंड पकड़ लिया और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

अबकी बार के राउंड में मैंने उसको उल्टा किया और उसकी गांड मारने की सोची.
उसने पहले तो मना किया. मगर वो राजी हो गई.

मैंने भाभी से कहा- तुम घोड़ी बन जाओ भाभी.

भाभी अपनी गांड का छेद दिखाने लगी.
तो मैंने उसकी गांड में बहुत सा थूक लगाया और लंड को भी लिसलिसा कर लिया.
मैंने धीरे से लंड गांड के छेद में पेला मगर अन्दर नहीं गया.

फिर मैंने एक जोर का शॉट मारा, तो सुपारा घुस गया.
वो जोर से चीखी- ओ … मां मार डाला रे.

मैंने उसके दुबारा चीखने से पहले ही एक करारा शॉट और दे मारा.
इस बार के धक्के में मेरा पूरा लंड उसकी गांड की जड़ तक घुसता चला गया.
वो दर्द से रोने लगी- मर गई रे … आह निकाल ले हरामी … माँ के लौड़े फ्री की मिल गई साले.. तो रंडी समझ कर चोद रहा है.

मैं हंसते हुए उसकी गांड मारने में लगा रहा.
धीरे धीरे उसको भी मजा आने लगा.
वो मस्त आवाजें निकालने लगी- ऊह आह आई लव यू सुरेश!
मैंने भी कहा- लव यू हेमा डार्लिंग.

मैंने उसकी गांड ऐसी जोरदार मारी कि उसको बहुत मजा आया.
फिर उस रात मैंने भाभी को चार बार चोदा और उसके साथ खूब मजे लिए.

अब वो अपने पति से ज्यादा मेरे साथ मजा आने की बात कहती है.
भाभी कहती है कि उसका पति उसको पांच मिनट ही चोद पाता है … फिर झड़ कर सो जाता है. उसकी आग ठंडी नहीं होती थी, तो वो अपनी चुत में उंगली करके उसे शांत करती थी.

अब जब भी हेमा भाभी को चुदवाना होता था, तो मुझे बुला लेती.

उसके साथ मैंने कई बार चुदाई की और हर बार उसने अपनी चुदाई की कहानी अन्तर्वासना पर लिख कर डालने के लिए कहा.
इसलिए मैंने आज ये चुदाई की कहानी आपको सुनाई है.

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