चाचा के घर में की चुदाई

अपनी सेक्सी चाची की चूत का मजा लिया मैंने उन्हीं के घर में! मैं एग्जाम देने दूसरे शहर गया. वहां चाचा का घर है. इत्तेफाकन चाची उन दिनों अकेली थी और …

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार।

मैं अनुराग हूं और अपनी सेक्सी चाची की चूत चुदाई की कहानी आपको बताना चाहता हूं.

अन्तर्वासना पर मैं रोज कहानियां पढ़ता हूं और मुझे बहुत मजा आता है चुदाई की हॉट स्टोरी पढ़कर।

अब मैं आपको अपना वाकया बताता हूं. एक बार मेरा एस.एस.सी. का एक्जाम कानपुर में था.

वहीं पर मेरी सेक्सी चाची रहती थी जो काफी सेहतमंद थी. कहने को उसे मोटी भी कहा जा सकता है.
उसकी हाइट 5.4 फीट की है. उसके दूध 38 के हैं और गांड 40 की।
वो रंग की गोरी है और पूरी मस्त चोदू माल लगती है.

मैं भी तगड़े जिस्म का हूं क्योंकि मैं काफी समय से जिम करता आ रहा हूं.

तो जब मैं चाची के यहां पहुंचा मैंने बेल बजाई और चाची दरवाजे पर आई.
उसने दरवाजा खोला तो मैं चाची को देखकर दंग रह गया.
चाची ने छोटा ब्लाउज, चमकीली साड़ी और होंठों पर लाल लिपस्टिक लगा रखी थी.

वो तो देखने में एकदम दुल्हन जैसी लग रही थी. उसके गोरे बदन पर वो चमकीली साड़ी और भी ज्यादा सज रही थी.

मैं तो चाची को देखता ही रह गया. मन में चुदाई के ख्याल आने लगे.

जब हम किसी रिश्तेदार या जानकार के यहां जाते हैं तो इस तरह के ख्याल आना लाजमी है.
ये लंड भी बड़ा हरामी है. इसको हर जगह चूत की ही तलाश रहती है.

चाची मेरा हाथ पकड़ कर अंदर ले गयी.
वो मुझे देखकर काफी खुश लग रही थी.

उसने मुझे सोफे पर बैठाया और पानी लेकर आई.
उसके बाद वो चाय लेने के लिए चली गयी.

कुछ देर में चाची चाय बनाकर ले आयी. मेरे साथ ही बैठकर उसने चाय पी.

चाची के ब्लाउज का गला काफी खुला हुआ था. साड़ी का पल्लू थोड़ा नीचे था. उनके बड़े बड़े बूब्स साफ दिखाई दे रहे थे.

चाची कप उठाते हुए बोली- तुम नहा लो. तब तक मैं खाना बना देती हूं.
मैंने कहा- ठीक है, मगर चाचा कहां गये हैं और कब तक आएंगे?
चाची बोली- वो दो-तीन दिन के बाद आयेंगे.

फिर मैं नहाने के लिए चला गया.
जब मैं नहाने लगा तो मैंने देखा कि मेरा टॉवल बाहर रह गया है.
मैं पूरा गीला था और मेरे पास बदन पर लपेटने के लिए कोई कपड़ा भी नहीं था.

मैंने सोचा कि चाची को ही आवाज लगा देता हूं. मैंने आवाज लगाई- चाची, एक बार मेरा तौलिया दे दो. मैं बाहर भूल गया हूं.

दो मिनट बाद चाची तौलिया लेकर आ गयी. दरवाजा खुला हुआ था. मेरा पूरा बदन भीगा हुआ था.
मेरा लंड भी मेरे कच्छे में साफ झलक रहा था क्योंकि भीगने के कारण अंडरवियर का कपड़ा लंड से चिपक गया था.

चाची बाथरूम के दरवाजे पर खड़ी हो गयी. मैं सामने वाली दीवार के पास था. मैंने जैसे ही आगे की ओर झुककर हाथ बढ़ाया तो पीछे से मेरा पैर फिसल गया और मैं धड़ाम से नीचे गिर गया.

चाची- अरे … अरे … संभाल … ओफ्फ … गिर गया ना … ला मुझे हाथ दे.
नीचे झुककर चाची ने हाथ बढ़ाया और मुझे उठाने लगी.

उठते हुए मैंने चाची का हाथ पकड़ा और दूसरे हाथ से दीवार को पकड़ कर सहारा लिया.

इस बीच खड़े होते हुए चाची का हाथ मेरे लंड से टच हो गया.
चाची ने एकदम से मेरे लंड से हाथ हटा लिया.

मगर दोनों को ही इस बात का अहसास था कि उनका हाथ मेरे लंड से टच हो गया है.

न जाने क्यों मेरा लंड तनाव में आने लगा और न चाहते हुए भी तन गया.
चाची वहीं पर थी.

वो मेरे बदन को छूकर देखने लगी कि कहीं चोट न लग गयी हो.

उनके हाथ मेरे बदन को छू रहे थे और मेरा लंड हर छुअन के साथ और ज्यादा टाइट हो रहा था.
देखते ही देखते पूरा लौड़ा कच्छे में अकड़ कर खड़ा हो गया.

मेरे अंडरवियर में मेरा लंड पूरा तंबू बना चुका था.

जब चाची आगे की ओर आयी तो उनकी नजर मेरे अंडरवियर के तंबू पर गयी.
मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन मेरी उत्तेजना और मेरे लंड पर मेरा कोई कंट्रोल नहीं था.

मैंने चाची की ओर बहाने से देखा तो वो नीचे ही नीचे मुस्करा रही थी.
फिर वो बोली- देख कितना बड़ा हो गया है लेकिन तुझसे संभाला भी नहीं जाता.

चाची की ओर मैंने हैरानी से देखा.
मैंने सोचा कि चाची मेरे लंड के तनाव को लेकर टिप्पणी कर रही है.

फिर वो दोबारा से बोली- तुझे ही बोल रही हूं हरामी. तू कितना बड़ा हो गया है लेकिन तुझसे खुद को भी संभाला नहीं जाता है. गिर गया बाथरूम में।

मैंने कहा- चाची … वो पैर फिसल गया था.
वो बोली- ठीक है, जल्दी से नहाकर बाहर आ जा और दोबारा से मत गिर जाना. कभी एक बार फिर मुझे ही आकर खड़ा करना पड़े!!

चाची अब हर बार डबल मीनिंग बात कर रही थी.
मुझे भी शक होने लगा कि कहीं चाची भी चुदाई का इंतजार तो नहीं कर रही?
ये सोचकर मेरे लंड में और झटके लगने लगे.

फिर मैंने दरवाजा बंद करके मुठ मारी और तब जाकर मेरा नाग शांत हुआ और उसका फन नीचे गिर गया.

नहाने के बाद मैं बाहर आ गया और कपड़े पहन लिये.

अब तक चाची ने खाना भी लगा दिया था.
हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया.
खाते हुए चाची मेरे पास ही बैठी थी. उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया.

शायद इस बार चाची ने पल्लू जानबूझकर गिराया था क्योंकि वो बार बार मुस्करा रही थी.

मेरी नजर चाची के बूब्स पर गयी. उनकी चूचियों की घाटी बहुत गहरी थी.
मेरा लौड़ा फिर से तनाव में आने लगा. हर निवाले के साथ चाची पूरी नीचे झुक जाती थी और अपनी चूचियों की क्लीवेज मुझे अच्छे से अंदर तक दिखा रही थी.

मैं भी चाची की चूची देखने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा था.
उधर चाची की नजर भी नीचे मेरे लंड पर जा रही थी.

हमने खाना खत्म किया और फिर चाची नहाने के लिए चली गयी.

थोड़ी देर में वो नहाकर आ गयी. वो अपने रूम में जाकर तैयार होने लगी.

मैं बाहर बैठा हुआ टीवी देख रहा था.
तभी उनकी आवाज आई- इधर आ अनुराग. मेरे कमरे में आना ज़रा!

मैं उठकर चाची के रूम में गया तो वो साड़ी पहन रही थी और उनको कंधे पर साड़ी के ऊपर पिन लगानी थी.
चाची मोटी थी तो सही जगह पर पिन नहीं लगा पा रही थी.

वो बोली- मेरे पास आ और ये पिन मेरी साड़ी पर लगा दे.
फिर मैं उनके पास गया और उनकी साड़ी पर पिन लगाने लगा.

मेरा लंड चाची की गांड के बिल्कुल पास था.
उनके चूतड़ इतने मोटे थे कि गांड का उभार मेरे लंड तक पहुंच रहा था. चाची की गांड बार बार मेरे लंड पर टच हो रही थी.

मेरा लंड खड़ा होने लगा क्योंकि घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था. ऐेसे में चुदाई के ख्याल आना स्वाभाविक था.

तभी मेरे हाथ से पिन छूटकर नीचे गिर गयी.
वो चाची के पैरों में गिरी और चाची उसको उठाने के लिए जैसे ही नीचे झुकी तो उसकी गांड मेरे लंड पर बिल्कुल ही सट गयी.

मेरे लंड में जोर का झटका लगा और चाची को भी ये बात महसूस हुई.
पिन ढूंढने के बहाने से वो झुकी हुई ही अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाने लगी.

मैं भी हवशी हो गया था और अब शर्म खत्म होने लगी थी और हवस हावी हो रही थी.

मैंने हिम्मत करके चाची की गांड को पकड़ लिया और चाची ने भी मेरे हाथों पर हाथ रखकर मुझे अपनी गांड की ओर खींच लिया जैसे कि वो चुदने जा रही हो.

अब तो मुझे चाची का इशारा मिल गया था और मैंने उनकी गांड को थाम लिया और अपनी लोअर में से ही उसकी गांड पर लंड को रगड़ने लगा.
उसकी स्स्स … करके एक सिसकारी निकल गयी.

फिर जैसे ही वो ऊपर उठी हमने एक दूसरे की आंखों में देखा तो दोनों ही सेक्स के मूड में आ चुके थे.

चाची ने मेरे लंड पर हाथ रख दिया और मैंने उसकी गांड पर हाथों को दबा दिया.

हमारे होंठ मिल गये और हम वहीं खड़े खड़े किस करने लगे.
चाची मेरा साथ देने लगी.
मैं चाची के होंठों का रस जोर जोर खींचने लगा.

फिर मैं उसको बेड पर गिराकर उसके ऊपर लेट गया.
मैंने चाची के बड़े बड़े फुटबाल जैसे बोबे थाम लिये मगर एक हाथ में एक बोबा आ ही नहीं रहा था. एक बोबे पर दोनों हाथों को लगाना पड़ गया.

मैं दोनों हाथों से उसकी चूची भींचने लगा और उसके होंठों को चूमता रहा.
वो भी मेरी पीठ को सहलाने लगी और चुम्बन में मेरा साथ देती रही.

अब मैंने उसकी चूचियों को छोड़ा और उसकी चूत की ओर हाथ ले गया.

चूंकि चाची ने साड़ी पहनी थी इसलिए चूत को हाथ सही से नहीं महसूस कर पा रहा था.

तो मैंने उनकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया.
उसने फिर खुद ही साड़ी खोल फेंकी और अब ब्लाउज के हुक खोलने लगी.

जैसे ही हुक खुले उनके फुटबॉल जैसे चूचे बाहर उछल पड़े.

मैं- आह्ह … इतने मोटे बूब्स चाची?
वो बोली- हां, इनको पीना चाहेगा?
मैंने कहा- इनको तो निचोड़ लूंगा मैं!

वो बोली- तो फिर आ ना … निचोड़ ले.
कहते ही मैं चाची के बूब्स पर टूट पड़ा और उनके एक एक स्तन को बारी बारी से चूसा.
चाची के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.

चूची पिलाने के बाद उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये और फिर मुझे भी नंगा कर दिया.
मैं उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को रगड़ने लगा.
उनकी चूत गीली हो गयी थी.

फिर उसने मुझे बेड पर पटका और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.
मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया.
चाची मस्त लौड़ा चूस रही थी.
शायद चाचा का लंड उसने खूब चूसा था.

काफी देर तक वो लंड चूसती रही और मुझे मजा देती रही.
फिर मैंने भी उसकी पैंटी को उतार दिया और उसकी नंगी चूत को हाथ से रगड़ दिया.
चाची की चूत बहुत बड़ी थी.

उसके बाद मैंने उसकी टांगों को खोला और उसकी पाव रोटी जैसी चूत पर अपने लंड का सुपारा घिसाने लगा.

चाची सिसकारते हुए अपने चूचे दबाने लगी और बोली- आह्ह … अनुराग … घुसा दे अब … आह्ह … चोद दे ना अब जल्दी!
मैंने कहा- ठीक है चाची।

फिर मैंने उसकी चूत में लंड पेल दिया.
एक ही झटके में लौड़ा उसकी चूत में उतर गया और उसके चेहरे पर संतुष्टि सी आ गयी. लगा जैसे उसकी चूत लंड के इंतजार में सदियों से बैठी थी.

मैं चाची की चुदाई करने लगा.
अब उसके मुंह से चुदाई की आवाजें निकलने लगी- आह्ह … अनु … आह्ह … ओह्ह … तू पहले क्यों नहीं आया … आह्ह … बहुत दिनों से लंड नहीं लिया था. आह्ह … चोदे मेरे बच्चे … आह्ह … और चोद।

मैं चाची की सिसकारियों से और ज्यादा उत्तेजित हो गया और तेजी से उसकी चूत में लंड पेलने लगा.
चाची चुदाई के नशे में चूर हो गयी.

मैं भी उसकी चूत में तेजी से लंड को पेलता जा रहा था.

दस मिनट चोदने के बाद अब मेरा छूटने को हो गया.
मैं बोला- चाची, मेरा निकलने वाला है. क्या करना है? अंदर छोड़ दूं क्या?
चाची- हां, अंदर ही छोड़ दे. मैं तो तेरा माल अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूं. तेरे बच्चे की मां बनना चाहती हूं.

चाची की सेक्सी बातें सुनकर मैंने और तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिये और दो मिनट बाद मेरे लंड का माल चाची की चूत में गिरने लगा.
मैं पूरा वीर्य खाली करके उनके ऊपर ही लेट गया और ऐसे ही सो गया.

जब मेरी आंख खुली तो चाची उठ चुकी थी और तैयार हो रही थी.
मैं उठा और नंगा ही चाची के पीछे जाकर चिपक गया.

मैंने उसकी गांड में लंड सटा दिया और उसको घुमाकर उसके होंठों को पीने लगा. मैंने होंठ चूसते हुए चाची की लिपस्टिक भी चाट डाली.

उसके बाद वो मुझे नहलाने ले गयी. जब वो नहलाते हुए मेरे लंड को साफ करने लगी तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

वहीं बाथरूम में ही मैंने चाची की साड़ी उठा ली और उसको दीवार से लगाकर उसकी चूत में पीछे से लंड डालकर चोदने लगा.
चाची भी मस्त होकर चुदी और मैं एक बार फिर से चाची की चूत में ही झड़ा.

इस तरह से मैं तीन दिन चाची के यहां रहा और इन तीन दिनों में मैंने चाची की चुदाई बड़े ही मस्त ढंग से की.
चाची की चुदाई के वो तीन दिन हमेशा मुझे याद रहते हैं.

दोस्तो, जब मैं वहां से लौटा तो चाची रोने लगी थी. वो मुझे रेलवे स्टेशन तक छोड़ने भी आई थी.

फिर हमारी फोन पर बात होती रही.
उसके बाद एक दो बार फिर उसकी चुदाई का मौका मिला.
अब जब मैं अगली बार चाची की चुदाई करूंगा तो आप लोगों को जरूर बताऊंगा.

आपको मेरी यह स्टोरी कैसी लगी इसके बारे में जरूर बताना. आप सब का यह सेक्सी चाची की चूत कहानी पढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

मैंने अपना ईमेल नीचे दिया हुआ है. आप कहानी के नीचे दिये गये कमेंट् बॉक्स में भी अपनी बात लिख सकते हैं. जल्दी ही आपसे अगली कहानी में मुलाकात होगी. धन्यवाद।

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